लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी को 2019 के लोकसभा चुनाव में शिकस्त देने की तैयारी में विपक्ष की योजना को बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती भी धार देने में लगी हैं. मायावती करीब 15 वर्ष के बाद लोकसभा के चुनावी मैदान में उतरने के मूड में हैं.
लोकसभा के बाद राज्यसभा से शीर्ष सदन में जगह बना चुकीं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को अब लोकसभा सीट तय करनी है. उत्तर प्रदेश में लोकसभा के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी को दो सीट दिलाने में मदद करने वाली मायावती का संकेत है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की आधी से अधिक सीट यानी करीब 50 पर बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी उतारेगी. बसपा सुप्रीमों मायावती 2019 के लोकसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही हैं. इसके लिए उन्होंने लोकसभा सीट की तलाश शुरू कर दी है.
मायावती को पता है कि केंद्र की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से ही होकर जाता है. भाजपा को 2019 में सत्ता में आने से रोकने के लिए मायावती और अखिलेश यादव के एक साथ आने की उम्मीद है. अखिलेश के साथ गठबंधन में मायावती खुद किस सीट से चुनाव लड़ेंगी, यह उनको तय करना है. इससे पहले 2004 में मायावती अकबरपुर सीट से लोकसभा चुनाव जीती थीं.
बसपा का यह पुराना गढ़ है लेकिन यह सीट समान्य हो गई. इसी कारण वह अपने गृह जिले गौतम बुद्ध नगर से चुनाव मैदान में उतर सकती हैं. वह अभी तक राज्यसभा और विधानपरिषद के रास्ते सदन तक पहुंचीं हैं. अब डेढ़ दशक बाद उनके एक बार फिर से ताल ठोंकने की तैयारी है. अगर गठबंधन के तहत मायावती चुनाव लड़ती है तो निश्चित तौर पर बसपा को जमीनी स्तर पर काफी फायदा होगा. इसके अलावा गठबंधन के तहत अखिलेश यादव भी मायावती के लिए प्रचार करते नजर आ सकते हैं.
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