ऐसे में जब देश भर में किसान आंदोलन की धमक पहुंच चुकी है, लगता है सरकार फिलहाल कोई दूसरा विवाद नहीं होने देना चाहती है। केंद्र की मोदी सरकार ने दो फरवरी को लोकसभा में कहा कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए), 2019 को लागू करने में और समय लगेगा। सरकार ने कहा है कि नियमों उपनियमों के निर्माण की तैयारी चल रही है। सरकार ने गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति को यह भी बताया कि उसने पूरे राष्ट्र के लिए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लागू करने के बारे में भी अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है।
यहाँ नोट करना चाहिए कि सीएए अधिनियम, 2019 को 12 दिसंबर, 2019 को अधिसूचित किया गया था और यह 10 जनवरी 2020 से लागू हुआ था। इस विवादित एक्ट के तहत नियम तैयार किए जा रहे हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा को लिखित जवाब में कहा संबंधित नियमों को बनाने के लिए 9 अगस्त, 2021 तक का समय बढ़ा दिया है।
बीते साल इस कानून के आते ही सरकार को भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। आसाम राज्य का उदाहरण बताता है कि इस कानून से मुसलमानों की बजाय अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों की नागरिकता एवं पहचान पर सबसे बुरा असर पड़ा है। इसीलिए बहुजन खेमे में यह धारणा बन चुकी है कि असल में यह कानून भारत के ओबीसी, दलितों एवं आदिवासियों सहित अल्पसंख्यकों के खिलाफ बनाया गया है। पिछले साल इस कानून के खिलाफ शाहीन बाग़ जैसे आंदोलन पूरे देश में सुलग उठे थे। लॉकडाउन के कारण ये आंदोलन खत्म हो गए थे। लेकिन इस साल किसान आंदोलन ने सरकार को भारी चुनौती दी है जिसके कारण सरकार बैकफुट पर आ रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि शायद इसी कारण सरकार की लोकप्रियता घट रही है और आगामी महीनों में विधानसाभा चुनावों के मद्देनजर सरकार नागरिकता संशोधन कानून को मुद्दा बनाकर कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती है।
फोटो क्रेडिट- नवभारत टाइम्स

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