बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वजह बहुत खास है। कुछ ऐसा जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। लेकिन सियासत के खेल निराले होते हैं। वही नीतीश कुमार जिन्होंने वर्ष 2013 में नरेद्र मोदी को अपने घर पर दावत देने का आमंत्रण वापस ले लिया था, शुक्रवार को योगी आदित्यनाथ की दूसरी ताजपोशी के दौरान नरेंद्र मोदी के चरणों में कुछ ज्यादा ही झुक गए।
सामान्य तौर पर यह लोकाचार है कि जब दो नेता मिलते हैं तो एक-दूसरे का सम्मान करते ही हैं। लेकिन नीतीश कुमार, जिन्हें उनकी पार्टी के नेतागण पीएम उम्मीदवार बताने की कोशिशें करते रहते हैं, लखनऊ के इकाना इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में हजारों की भीड़ के सामने जब नरेंद्र मोदी से मिले तो उन्होंने अपनी ही राजनीतिक मर्यादा को तोड़ दिया।
बताते चलें कि नीतीश कुमार की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में रही है, जो राजनीतिक संबंधों को महत्व तो देते ही हैं, अपने स्वाभिमान की रक्षा भी करते हैं। जैसे कि वर्ष 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव के पहले जब नीतीश भाजपा से अलग हो गए थे और लालू प्रसाद की शरण में चले गए थे, तब राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में उन्होंने नरेंद्र मोदी की अवहेलना की थी। तब हुआ यह था कि न तो नरेंद्र मोदी ने और ना ही नीतीश कुमार ने एक-दूसरे का सम्मान किया था।
खैर, मौजूदा दौर भाजपा के सितारे आसमान पर हैं। मुकेश सहनी की पार्टी के तीनों विधायकों के भाजपा में चले जाने के बाद बिहार में भाजपा वैसे भी 77 विधायकों के साथ नंबर वन पार्टी बन गयी है। ऐसे में भाजपा की कृपा से नीतीश कुमार का बिहार में मुख्यमंत्री बने रहना भी एक मजबूरी हो सकती है कि योगी आदित्यनाथ की ताजपोशी के दौरान उन्होंने खुद को सबसे अधिक वफादार साबित करने की कोशिश की।

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