नई दिल्ली। गोरखपुर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में जहर खाकर शोध छात्र दीपक कुमार ने बृहस्पतिवार को खुदकुशी करने की कोशिश की. गंभीर हालत में शोध छात्र को जिला अस्पताल ले जाया गया. हालत बिगड़ने के बाद उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया. जहर खाने से पहले शोध छात्र ने मोबाइल से वीडियो बनाया और डीन कला संकाय प्रो. सीपी श्रीवास्तव के साथ विभागाध्यक्ष प्रो. द्वारिकानाथ पर उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया.
दीपक ने कहा कि तीन महीने से दौड़ाया जा रहा है. साथ ही जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करके अपमानित किया जा रहा. इस मामले को विश्वविद्यालय प्रशासन ने गंभीरता से लिया. कुलपति ने विभागाध्यक्ष प्रो. द्वारिका को पद से हटा दिया. साथ ही प्रति कुलपति प्रो. एसके दीक्षित की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी. कुलपति का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
झंगहा क्षेत्र के राघोपट्टी निवासी जगदीश के पुत्र दीपक ने इसी वर्ष दर्शनशास्त्र विभाग में शोध के लिए पंजीकरण कराया है. वह बिलंदपुर में किराए का मकान लेकर रहता और पढ़ाई करता है. दीपक ने अपराह्न तीन बजे के आसपास जो वीडियो बनाकर वायरल किया, उसके मुताबिक मनमाफिक शोध सुपरवाइजर प्रो. डीएन यादव को चुना था. इस वजह से डीन कला संकाय, विभागाध्यक्ष नाराज थे. आए दिन दुर्व्यवहार और जातीय टिप्पणी करते थे. दीपक का आरोप है कि दर्शनशास्त्र विभाग के इन दो शिक्षकों ने मेरी पीएचडी पूरी न करने देने की धमकी दी थी.
इस मामले की शिकायत कुलपति से छह सितंबर को ही की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. बल्कि इसका उल्टा असर हुआ. डीन, विभागाध्यक्ष का नाम लेकर 18 सितंबर को विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर कुछ लोगों ने मुझे जान से मारने की धमकी देने लगे. इसके बाद दीपक ने वीडिया बनाकर वायरल किया.
दीपक ने कहा कि सारे मामले से कुलपति को अवगत कराने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई. मैं अवसाद में हूं और आत्महत्या करने जा रहा हूं. बाद में दर्शनशास्त्र विभाग में ही जाकर जहर खा लिया. इसकी जानकारी हुई तो अफरा-तफरी मच गई. आनन-फानन में दीपक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. अब मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन वार्ड में इलाज चल रहा है.
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