अनंतनाग। सोमवार की रात दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रा से लौट रहे यात्रियों से भरी बस पर आतंकियों ने हमला कर दिया. दरअसल ये बस पुलिस पार्टी और आतंकियों के बीच चल रही मुठभेड़ के बीच आ गई और इसमें सात यात्री मारे गए. यात्रियों से भरी बस गुजरात में रजिस्टर्ड थी, बस में चालीस यात्री सवार थे, मारे गए सात यात्रियों में पांच गुजरात के और दो महाराष्ट्र के हैं. करीब 15 यात्री जख्मी भी हुए जिनका इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है. ज्यादातर यात्रियों की हालत स्थिर बनी हुई है. दो को एयरलिफ्ट कर दिल्ली लाया गया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले की कड़ी निंदा की है, उन्होंने कायराना हमला बताया और कहा कि इस तरह के हमलों से आतंकवाद को खत्म करने के भारत के इरादों को कोई डिगा नहीं सकता. रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने भी कहा कि इस हरकत से भारत के इरादे और मजबूत हुए हैं. हमले के बाद सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है. जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस हमले को कश्मीरियत और मुसलमानों के लिए एक दाग बताया है. श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है.
विपक्षी दल के नेताओं ने भी इस हमले की निंदा की है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि फिर ऐसा ना हो. नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारुक अब्दुल्ला ने इस हमले को कश्मीरियत के खिलाफ बताया है.
हमले के पीछे पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का नाम सामने आ रहा है. जम्मू कश्मीर पुलिस के आईजी मुनीर खान ने कहा है कि पाकिस्तान के आतंकी इस्माइल ने इस हमले की साजिश की. उनकी मानें तो लश्कर का आतंकी इस्माइल ही इस आतंकी हमले का मास्टरमाइंड है. जम्मू कश्मीर पुलिस को शक है कि पाकिस्तान में इस हमले की साजिश रची गई और इसका मकसद देश में सांप्रदायिक तनाव पैदा करना था.
अधिकारियों की मानें तो यह भी हो सकता है कि यह हमला सुरक्षाबलों से बदला लेने के मकसद से अंजाम दिया गया हो. खास बात यह है कि हमला उत्तर प्रदेश के संदीप शर्मा की गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद हुआ. संदीप कश्मीर में लश्कर का आतंकी था और पहला गैर-कश्मीरी आतंकी भी है जो पुलिस के हत्थे चढ़ा है.
नेशनल कांफ्रेंस, कांग्रेस, विहिप और जेकेएनपीपी सहित कई राजनीतिक दलों ने कश्मीर के अनंतनाग जिले में अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले के विरोध में आज जम्मू बंद का आव्हान किया है. बंद को देखते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले के बाद घाटी में तनाव को देखते हुए इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है. किसी तरह की अफवाहें ना फैलें, इसलिए ऐहतियातन सरकार ने ये कदम उठाया है.
हमले से बेखौफ अमरनाथ यात्रियों का अगला जत्था यात्रा के लिए रवाना हो चुका है. इस जत्थे में करीब 3 हजार यात्री शामिल हैं. पूरे मार्ग में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए हैं.
ये पहला मौका नहीं है जब आतंकियों ने अमरनाथ यात्रियों को अपनी गोलियों का निशाना बनाया है. इससे पहले भी वो इस तरह की कायराना हरकत करते रहे हैं. एक अगस्त 2000 को अमरनाथ यात्रा पर सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ था. इस हमले में 30 लोगों की जान चली गई थी. उस हमले को भी लश्कर ने ही अंजाम दिया था. लश्कर के आतंकियों ने पहलगाम में यात्रा के बेस कैंप को निशाना बनाया था.
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